
नालागढ़ (सोलन)। प्रदेश के भीतर सामान की खरीद पर मिलने वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट की अब तक की सबसे बड़ी धोखाधड़ी आबकारी एवं कराधान विभाग ने नालागढ़ ने पकड़ी है। केबल फर्म ने सरकार को इसी खरीद के तहत 15 करोड़ 55 लाख का चूना लगा डाला है। जबकि यह सामान खरीदा ही नहीं गया है।
आबकारी एवं कराधान विभाग की जांच में यह बात सामने आई है। निर्देशानुसार आबकारी एवं कराधान विभाग की टीम ने कार्रवाई करते फर्म से 2 करोड़ की रिकवरी नगद की है। वहीं 13.55 करोड़ के पीओडी (पोस्ट डेटेड चेक) वसूले गए हैं। इसके बाद जुर्माने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। वहीं दो अन्य मामलों में 16 लाख और 9 लाख क्रेडिट इनपुट में अनियमितताएं पकड़ी हैं। इनमें 7 लाख रुपये रिकवर किए गए हैं। ईटीओ नालागढ़ राजीव शर्मा ने यह जांच की है। विभाग ने बड़ी कार्रवाई के लिए इस अफसर की पीठ थपथपाते हुए उनकी तुरंत ट्रांसफर रोक दी है।
हिमाचल प्रदेश आबकारी एवं कराधान आयुक्त आरएस नेगी ने इसकी पुष्टि की है। आबकारी एवं कराधान सहआयुक्त बद्दी डा. सुनील ने बताया कि इनपुट टैक्स क्रेडिट किसी फर्म को प्रदेश के भीतर परचेज पर मिलता है। यह लाभ कम टैक्स की दरों के जरिये दिया जाता है।
ऐसे हुई हेराफेरी
केबल बनाने वाला उद्योग प्रबंधन सरकारी आईटीसी योजना का लाभ उठाने के लिए प्रदेश के भीतर माल खरीदने के दस्तावेज प्रस्तुत करता रहा। इसके आधार पर करीब 15.55 करोड़ का लाभ सरकार की तरफ से देय हो गया। इस लाभ को फर्म आउटपुट क्रेडिट में एडजस्ट करती रही। जब जांच हुई तो पाया गया कि हिमाचल में उद्योग खरीद ही नहीं की है।
अन्य भी शिकंजे में
प्रदेश भर से परचेज के बिल जमा करने वाली फर्में भी विभाग के निशाने पर हैं। पत्र लिखकर तमाम फर्मों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। अंदेशा है कि अन्य फर्मों से परचेज के फर्जी दस्तावेजों को हासिल करने में कई पेंच हो सकते हैं।
किराये का कांप्लेक्स बताया निजी
रिकवरी के लिए विभाग की राहें भी आसान नहीं है। उद्योग की ओर से निजी बताया गया कांप्लेक्स जांच के दौरान किराये का निकला है। यहां तक की मशीनरी पर भी संदेह है। लिहाजा टैक्स रिकवरी के लिए फूंक फूंक कर कदम रखे जा रहे हैं। अगर कुर्की की नौबत आई तो कंपनी के पास न के बराबर अचल संपत्ति है।
